Arvind Trivedi मृत्यु से पहले रावण का किरदार निभाते हुए बोले गए 10 सबसे लोकप्रिय डायलॉग्स dialogues

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Arvind Trivedi 10 most famous dialogues in Ramanand Sagar Ramayan
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आप सभी जानते हैं कि रामानंद सागर में रावण की भूमिका निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी (Arvind Trivedi) जी का निधन हो गया है. वह एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अपने किरदार के बलबूते रामायण सीरियल में लोगों के दिलों पर अपने द्वारा कही गई बातों और डायलॉग और अपने अभूतपूर्व अभिनय से ऐसी छाप छोड़ी कि जिसे लोग आज तक भी नहीं भूल पाए हैं.

Arvind Trivedi Death

रामायण तो रामानंद सागर की रामायण बनने के बाद बहुत सारी बनी लेकिन जैसी लोकप्रियता रामानंद सागर की रामायण ने हासिल की वैसी आज तक कोई भी हासिल नहीं कर पाया है, और शायद ही कोई हासिल कर पाएगा. रामानंद सागर की रामायण को अरविंद त्रिवेदी द्वारा निभाए गए रावण के किरदार और उनके द्वारा दिल को छू लेने वाली अभिनय के साथ बोले गए डायलॉग और उनकी बातों को याद कर रहे हैं.

क्योंकि अरविंद त्रिवेदी (Arvind Trivedi) जी का आज निधन हो गया उनका निधन दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुआ उनकी उम्र 82 साल की थी. उनके निधन पर देश-विदेश से शोक समाचार प्राप्त हो रहे हैं. उनके निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी दुख व्यक्त किया है.

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अभी कुछ दिन पहले तारक मेहता का उल्टा चश्मा के अभिनेता नट्टू काका यानी घनश्याम नायक (Ghanshyam Nayak) जी की भी मृत्यु हुई थी. उसका भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफसोस जताया है.

आज हम आपको अरविंद त्रिवेदी द्वारा रामानंद सागर के सीरियल रामायण में बोले गए 10 सबसे लोकप्रिय डायलॉग (Dialogues) सुनाने जा रहे हैं. जो लोगों को आज भी उनका उनकी कला का कायल कर देते हैं.

Arvind Trivedi मृत्यु से पहले रावण का किरदार निभाते हुए बोले गए 10 सबसे लोकप्रिय डायलॉग्स

Arvind Trivedi 10 most famous dialogues in Ramanand Sagar Ramayan
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  1. वीर पुरुष जिस रस्ते पर एक बार आगे पग बढ़ा देते हैं फिर उसे पीछे हटाने की बात भी नहीं सोचते। चाहे सामने मृत्यु ही क्यों न खड़ी हो।
  2. मान लिया हमने भ्रम से नारायण को नहीं पहचाना। मान लिया अपने चित्र के मोह में एक स्त्री का हरण कर लिया। मान लिया अपने गौरव और अहंकार में हमने किसी का परामर्श नहीं सुना। इन सब बातों की चर्चा करने से इतिहास पीछे नहीं मुड़ जाएगा। जो बीत गया बुद्धिमान उस का शौक नहीं करते। भविष्य की चिंता कर्म योगी नहीं करता। इस समय इस क्षण क्या करना है उसका ही निश्चय आवश्यक हो जाता है। 
  3. मंदोदरी शांति के लिए हम दोनों में से एक का अंत होना आवश्यक है। तुम राम को भगवान मानती हो। हो सकता है वह साधारण नर नहीं है। इंद्रजीत भी उसे नारायण कह गया। यदि वह नारायण है तो भी जीत रावण की है। जिसे मारने के लिए स्वयं भगवान को धरती पर दर-दर भटकना पड़ता है। उसकी यस गाता संसार कैसे भूलेगा। परमवीर रावण अमर रहेगा। वैकुंठ में जो हमारे गौरव को कम नहीं कर सका वह पृथ्वी पर हमारे गौरव को कैसे मिटा सकेगा। रावण का अमर पदक अक्षय था अक्षय है और अक्षय रहेगा।
  4. मृत्यु तो 1 दिनों से आएगी। परंतु जो कायर होते हैं वह मृत्यु के आने से पहले कई बार मर जाते हैं। जो जीवन के अंतिम दिन तक अपना मस्तक किसी के आगे झुकने न दे। जो वीरों भाँति लड़ते हुए मर जाये उसके जीने में भी शान है उनके मरने में भी शान है।
  5. जब भी कोई अपूर्व शक्ति प्राप्त कर लेता है, तो तुम्हारी माया ही उसे शक्ति के मद में पागल बना देती है शक्ति का मद तो तुम्हारे देवता भी सहन नहीं कर सकते उन्हें भी अहंकार आ जाता है।
  6. तुम मुझे और मेरे अहंकार को दंड देना चाहते हो। परंतु मैं अपने अहंकार को नहीं छोड़ सकता। मुझे अपनी शक्तियों पर अहंकार करने का पूर्ण अधिकार है. यह शक्तियां मुझे कोई दान में प्रदान नहीं हुई हैं। मेरी कठोर तपस्या के उपलक्ष्य में, कर्म के विधान के अनुसार तुम मुझे वो शक्तियां प्रदान करने के लिए विवश थे। मैंने अपने बाहुबल से यह शक्तियां प्राप्त की हैं। इसलिए मैंने उन पर अहंकार किया है।
  7. यही अवस्था मेरी है शक्तियां पाई उनसे अहंकार हुआ और उस अहंकार और शक्ति का मद सहन नहीं कर सका। उन शक्तियों के मद में दूसरों पर अत्याचार भी किए धर्म को छोड़कर अधर्म के मार्ग पर चला हूं तो उसका दंड भी भोगना पड़ेगा परंतु रावण दंड भी उसी तरह भोगेगा, जिस गर्व से उसने उन शक्तियों का भोग किया है।
  8. राम यदि नर है तो वह आज मेरे हाथों मारा जाएगा और यदि वह भगवान है तो रावण का वध करने में उसकी जितनी की ख़्याति होगी उतनी ख्याति युग युगांतर तक रावण की भी होगी। तीनों लोगों और तीनों कालों में हम दोनों का नाम सर्वदा एक साथ ही लिया जाएगा।
  9. इंद्रजीत ने सदा वीरों को धूल में मिला दिया। देवताओं का गर्व चूर चूर किया है। रणभूमि में इन वानरों से खिलवाड़ करने में आनंद नहीं। किसी वीर की वीर के साथ टक्कर हो तो योद्धा की रणबिपाशा पूरी होती है। अपने राम और लक्ष्मण से कहो कि सामने आए या अपने अस्त्र-शस्त्र हमारे चरणों में डालकर अयोध्या वापस लौट जाएं।
  10. इंद्रजीत याद रखो जो स्वयं ही अपने हाथों अपनी कृति को धूल में मिला देता है देवता भी उसका सम्मान नहीं करते। वह कहेंगे कि मृत्यु के डर से रावण में हार स्वीकार कर ली। हां उनकी शक्ति से तुम भयभीत लग रहे हो तुम्हारा मन और शरीर दोनों थक गए हैं। जाओ अपने महल में जाकर विश्राम करो। यह युद्ध रावण का है और रावण इसे अकेला ही लड़ देगा। क्षमा करें पिताश्री मैं आपके अपमान के लिए नहीं आप के कल्याण के लिए ही यह बातें करने आया हूं। जहां तक मेरा संबंध है मैंने युद्ध शुरू कर दिया है। अब यहां से भाग कर भगवान की शरण में जाने से भी अपयश ही मिलता है। इसलिए मैं एक वीर की भांति भगवान के हाथों मरने जाऊंगा। जो पिता से विमुख हो जाते हैं भगवान भी उनका आदर नहीं करते। इस समय मेरा स्थान राज महल में नहीं केवल युद्ध भूमि में है।

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Arvind Trivedi मौत की अफवाह

अरविंद त्रिवेदी काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे जिसके कारण उनकी मौत की अफवाह भी उड़ती रहती थी. अरविंद त्रिवेदी ने 300 के आसपास हिंदी और गुजराती फिल्मों में काम किया. उन्हें सन 2000 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन का एक्टिंग का चेयरमैन (Chairman of Acting) भी बनाया गया था. सन 1991 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर सांसद भी बने थे और 5 साल तक अपने पद पर भी कार्यरत रहे.

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लेकिन 2021 में लंबी बीमारी के बाद 6 October को उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए और परमपिता परमात्मा के चरणों में विलीन हो गए. Arvind Trivedi जी को उनके शानदार अभिनय के लिए यह पीढ़ी और आने वाली ना जाने कितनी ही पीढ़ीया याद रखेंगी और उनके अभिनय को हमेशा सराहती रहेंगी. 

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